श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 358
 
 
श्लोक  2.6.358 
अतस् तेषां हि नितरां
स वरीवृध्यते महान्
वियोग-योगयोः प्रेमा-
वेशावेगो निरन्तरम्
 
 
अनुवाद
इस प्रकार उनके जुनूनी प्रेम की शक्तिशाली शक्ति, मिलन और वियोग दोनों में, निरन्तर बढ़ती जाती है।
 
Thus the powerful force of their passionate love continues to grow, both in union and separation.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)