श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 336
 
 
श्लोक  2.6.336 
श्री-वसुदेव उवाच
भ्रातर् नन्द भवत्-सूनोः
साग्रजस्यास्य निर्वृतिः
भवेत् तत्रैव वसतः
सर्वथान्यत्र तु व्यथा
 
 
अनुवाद
श्री वसुदेव ने कहा: भाई नन्द! आपके पुत्र और उनके बड़े भाई व्रज में रहकर ही सब प्रकार से सुखी रह सकते हैं। अन्यत्र उन्हें दुःख के अतिरिक्त कुछ नहीं मिलेगा।
 
Sri Vasudeva said, "Brother Nanda, your son and his elder brother can only live happily in Vraja. Elsewhere, they will find nothing but sorrow."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)