मद्-आशया ते व्रज-वासिनो जना
भवज्-जनन्या सह सन्ति सासवः
गते विना त्वां मयि दारुणान्तरे
ध्रुवं विनङ्क्ष्यन्ति सपद्य् अमी पितः
अनुवाद
व्रजवासी और आपकी माता आज भी जीवित हैं और साँस ले रहे हैं, केवल इसलिए कि मैंने उन्हें आशा दी है। हे पिता, यदि मैं इतना कठोर हृदय होकर आपके बिना वापस चला जाऊँ, तो निश्चय ही वे वहीं मर जाएँगे।
The people of Vraja and your mother are still alive and breathing today only because I gave them hope. Father, if I were so hardhearted and went back without you, they would surely die there.
तात्पर्य
व्रज के सब लोग नंद बाबा के इस वचन पर भरोसा कर रहे थे कि वो बिना कृष्ण के वापस नहीं आएंगे| उनके उस वचन का उल्लंघन, उन सबको मृत्यु दंड देने जैसा होता| कृष्ण का मन बदलने के लिए नंद बाबा ने उनमें पारिवारिक भाव जगाने का प्रयास किया और कृष्ण को उनकी अबला माता की याद दिलाई| साथ ही उन्होंने कृष्ण को पिता कहकर खुद को कृष्ण का पुत्र बनाया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥