श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 319
 
 
श्लोक  2.6.319 
तथा सञ्चोदितास् तेन
हयास् ते वेगवत्-तराः
क्वासौ गतो न केनापि
शक्तो लक्षयितुं यथा
 
 
अनुवाद
वह घोड़ों को इतनी तेजी से भगा रहा था कि कोई नहीं बता सकता था कि वह कहाँ जा रहा है।
 
He was driving the horses so fast that no one could tell where he was going.
तात्पर्य
घोड़ों को खूब प्रशिक्षित किया गया था, वो कंस के वफ़ादार अनुयायी थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)