श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 318
 
 
श्लोक  2.6.318 
क्रोशन्तीनां च गोपीनां
कुररीणाम् इवोल्बणम्
पश्यन्तीनां प्रभुं जह्रे
’क्रूरः श्येन इवामिषम्
 
 
अनुवाद
गोपियाँ कुररी पक्षियों की तरह विलाप करती हुई देख रही थीं, तब अक्रूर कृष्ण को लेकर ऐसे भागे, जैसे कोई गरुड़ मांस का टुकड़ा लेकर भाग रहा हो।
 
The Gopis were watching, wailing like Kurri birds, then Akrura ran away with Krishna like an eagle running away with a piece of meat.
तात्पर्य
अक्रूर कृष्ण को उतनी ही तेजी से ले गए जैसे चील अपने शिकार को ले जाती है, और बिल्कुल उतनी ही बेरहमी से।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)