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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
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श्लोक 312
श्लोक
2.6.312
खगाश् च बभ्रमुस् तस्यो-
परि कोलाहलाकुलाः
सपद्य् उद्भिज्ज-जातीनाम्
अशुष्यन् पत्र-सञ्चयाः
अनुवाद
पक्षी कृष्ण के ऊपर इधर-उधर उड़ते हुए बहुत शोर मचाने लगे और अचानक पौधों की पत्तियाँ सूख गईं।
The birds started flying here and there over Krishna making a lot of noise and suddenly the leaves of the plants dried up.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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