श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 311
 
 
श्लोक  2.6.311 
ततो गावो वृषा वत्सा
मृगाश् चान्ये ’पि जन्तवः
आक्रोशन्तो ’श्रु-धौतास्यास्
तस्थुर् आवृत्य तं रथम्
 
 
अनुवाद
गाय, बैल, बछड़े, हिरण - सभी जानवर - रथ के चारों ओर खड़े होकर चिल्ला रहे थे, उनके चेहरे आँसुओं से भीगे हुए थे।
 
Cows, bulls, calves, deer – all the animals – stood around the chariot and cried out, their faces wet with tears.
तात्पर्य
यहां तक कि भेड़िए और सियार भी उस रथ के पास आकर रोनेवाले जानवरों के शोर में शामिल हो गए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)