श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  2.6.29 
इत्थं मुहुः स-कातर्यं
सम्पृच्छंस् तान् इतस् ततः
दृश्यमानान् पुरो भूत्वा
व्रज-स्थानान्य् अवाप्नुवम्
 
 
अनुवाद
इस तरह मैं इधर-उधर घूमता रहा, हर मिलने वाले से उत्सुकता से पूछताछ करता रहा। और जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ता गया, मैं ग्वालों के चरागाह में पहुँच गया।
 
So I wandered about, eagerly questioning everyone I met. As I continued on, I came upon the cowherds' pasture.
तात्पर्य
गोलोक में आने पर गोपा-कुमार को हुई चिंता वास्तव में दैन्यता का लक्षण थी, यानी अलौकिक, बिना शर्त नम्रता जो गोलोक में शाश्वत निवास पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण पूर्व शर्त है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)