तभी यशोदा बाहर आईं। दुखी होकर, आँखों से आँसुओं की धारा पोंछते हुए, उन्होंने अपने पुत्र का हाथ पकड़कर श्वाफल्कपुत्र अक्रूर के हाथ में रख दिया, मानो कृष्ण को सुरक्षा के लिए उन्हें सौंप रही हों।
Just then, Yashoda emerged. Saddened, wiping a stream of tears from her eyes, she took her son's hand and placed it in the hands of Akrura, the son of Svaphalka, as if handing Krishna over to him for safety.
तात्पर्य
मनु संहिता और अन्य धर्म शास्त्रों में चर्चित दीवानी कानून में न्यास या निक्षेप प्रमुख विषय है। जब कोई व्यक्ति किसी के पास सुरक्षा हेतु अपनी संपत्ति जमा करता है, तो जो व्यक्ति इस संपत्ति को रखता है वह गहराई से जिम्मेदार माना जाता है। यदि कोई व्यक्ति इस भरोसे को तोड़ते हुए दोषी पाया जाता है - उदाहरण के लिए, संपत्ति को उसके वैध मालिक को वापस करने में विफल रहने पर - तो सरकार को उसे कड़ी सजा देनी चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥