श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 264
 
 
श्लोक  2.6.264 
तच् छ्रुत्वान्यत्रिका अपि
शिला-काष्ठादयो नूनं
रुदन्ति विदलन्ति च
 
 
अनुवाद
यदि पत्थर, लकड़ियाँ और अन्य जड़ वस्तुएँ, यहाँ तक कि अन्य स्थानों से भी, व्रज में घटी घटना को सुनती हैं, तो वे चीखती हैं और टुकड़े-टुकड़े हो जाती हैं।
 
If stones, sticks and other inanimate objects, even from other places, hear what has happened in Vraja, they scream and break into pieces.
तात्पर्य
हम पहले से ही वृंदावन के पेड़ों और चट्टानों के असाधारण उन्मादी लक्षणों के बारे में बता चुके हैं, लेकिन अब हमें पता चलता है कि कृष्ण के निवास के बाहर की चीजें भी तबाह हो जाती हैं जब वे कृष्ण के द्वारा अक्रूर को व्रज से भगा ले जाने के किस्से सुनती हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)