पद्मोत्पलादिभिः पुष्पैर्
यामुनैस् ताभिर् आहृतैः
भूषणैस् तैश् च ता गोपीर्
आत्मानं च व्यभूषयत्
अनुवाद
फिर, पद्म, उत्पल तथा अन्य कमल पुष्पों से, जिन्हें उनकी पत्नियाँ यमुना से उन्हें अर्पित करने के लिए लाई थीं - तथा उन्हीं आभूषणों से, जो उन्होंने कालिया को पहनाए थे - कृष्ण ने गोपियों तथा स्वयं को सजाया।
Then, with the Padma, Utpala and other lotus flowers that his wives had brought from the Yamuna to offer him – and with the same ornaments that he had adorned Kaliya – Krishna adorned himself and the gopis.
तात्पर्य
जब नाग-पत्नियों ने कृष्ण जी को आभूषण भेंट किये, उन्होंने तुरंत इन्हें अपने शरीर पर नहीं पहना। पहले उन्होंने इन्हें कालिया के फणों पर रखा और फिर जब वो और गोपियाँ सब फणों पर ही खड़े थे, उन्होंने इन आभूषणों से गोपियों और खुद को भी सजाया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥