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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
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श्लोक 246
श्लोक
2.6.246
तैर् एकं प्रग्रहं दीर्घं
विरचय्यास्य नासिकाम्
विध्वा प्रवेश्य वामेन
पाणिनाधात् स कौतुकी
अनुवाद
इन वस्त्रों से उन्होंने एक लम्बी लगाम बनाई और अपने बाएं हाथ से खेल-खेल में कालिय की नाक में छेद कर उसमें धागा डाल दिया।
From these clothes he made a long rein and with his left hand, playfully pierced Kaliya's nose and put the thread through it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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