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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
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श्लोक 245
श्लोक
2.6.245
दमयित्वाहि-राजं स
स्तुवतीनां समाच्छिनत्
वस्त्राणि नाग-पत्नीनाम्
उत्तरीयाणि स-स्मितम्
अनुवाद
इस प्रकार सर्पों के राजा को वश में करने के बाद, कृष्ण ने मुस्कुराते हुए, सर्प की पत्नियों, नाग-पत्नियों के शॉल पकड़ लिए, जो उनकी पूजा कर रही थीं।
Having thus subdued the king of snakes, Krishna, smiling, took hold of the shawls of the snake's wives, the Naga-patnis, who were worshipping Him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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