श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 235
 
 
श्लोक  2.6.235 
तेन नादेन महता
बलरामः स चेतितः
आत्मानं स्तम्भयाम् आस
यत्नाद् धीर-शिरोमणिः
 
 
अनुवाद
उस कोलाहल से जागृत होकर, वीरों में परम दृढ़निश्चयी बलराम ने बड़े प्रयत्न से अपने को स्थिर किया।
 
Awakened by the uproar, Balarama, the most determined among warriors, steadied himself with great effort.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)