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श्लोक 2.6.229  |
पुनः प्रवयसस् तस्य
भग्न-कण्ठ-स्वरस्य तु
तद्-वाक्यं तेषु सहसा
वज्र-पात इवाभवत् |
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| अनुवाद |
| गले में रुंधी हुई आवाज में बोले गए बूढ़े आदमी की रिपोर्ट की अतिरिक्त ताकत ने अचानक उन पर बिजली की तरह प्रहार किया। |
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| The added force of the old man's report, spoken in a choked voice, suddenly struck him like lightning. |
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