श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 220
 
 
श्लोक  2.6.220 
एकदा यमुना-तीरे
विहरन् नन्द-नन्दनः
शुश्रावात्म-ह्रदे तस्मिन्
कालियं पुनर् आगतम्
 
 
अनुवाद
एक दिन, यमुना के तट पर खेलते समय, भगवान कृष्ण, नंद-नंदन ने सुना कि कालिया अपने सरोवर में वापस आ गया है।
 
One day, while playing on the banks of the Yamuna, Lord Krishna, the son of Nanda, heard that Kaliya had returned to his lake.
तात्पर्य
वह झील जिसमें कालिया रहता था, वृज से उसके निष्कासन के बाद भी कालिया-ह्रद ("कालिया की झील") के रूप में जानी जाती रही।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)