श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 191
 
 
श्लोक  2.6.191 
तत्-तद्-विशेषो निर्वाच्यो
’नन्त-शक्त्यापि नापरः
महार्ति-जनके तस्मिन्
को वा धीमान् प्रवर्तते
 
 
अनुवाद
असीमित शक्ति वाला व्यक्ति भी उन व्यवहारों का विस्तार से वर्णन नहीं कर सकता। लेकिन कोई बुद्धिमान व्यक्ति ऐसा करने की कोशिश भी क्यों करेगा? इससे तो केवल घोर दुःख ही उत्पन्न होगा।
 
Even a person with unlimited power cannot describe those behaviors in detail. But why would any intelligent person even try to do so? It would only lead to immense suffering.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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