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श्लोक 2.6.169  |
मिष्टं फलादिकं किञ्चिद्
भोजयित्वा सुतं पथि
पाययित्वा च गेहाय
यान्ती प्राग्-वन् न्यवर्तत |
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| अनुवाद |
| रास्ते में ही उसने उसे कुछ फल और कुछ मीठी चीज़ें खिलाईं और उसे कुछ पीने को दिया। फिर वह घर की तरफ़ जाने लगी और फिर वापस मुड़ गई। |
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| On the way, she fed him some fruit and sweets and gave him something to drink. Then she started toward home and then turned back. |
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