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श्लोक 2.6.167  |
तेनोक्तापि गृहं यान्ती
ग्रीवाम् उद्वर्तयन्त्य् अहो
पदान्य् अतीत्य द्वि-त्राणि
पुनर् व्यग्रा ययौ सुतम् |
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| अनुवाद |
| उसके कहने पर वह घर की ओर मुड़ी। लेकिन—ओह!—दो-तीन कदम चलने के बाद उसने अपनी गर्दन ऊपर उठाई और बेचैनी से अपने बेटे के पास वापस चली गई। |
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| At his command she turned towards the house. But—oh!—after two or three steps she raised her head and went back anxiously to her son. |
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