श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 159
 
 
श्लोक  2.6.159 
निवेश्य साग्रजं पुत्रं
पीठे ’रण्योचितानि सा
पर्यधापयद् अङ्गेषु
भूषणान्य् औषधानि च
 
 
अनुवाद
उन्होंने कृष्ण को उनके बड़े भाई के साथ एक कुर्सी पर बैठाया और उनके अंगों को आभूषणों और वन के लिए उपयुक्त औषधीय जड़ी-बूटियों से सुसज्जित किया।
 
He seated Krishna on a chair with his elder brother and adorned his body with ornaments and medicinal herbs suitable for the forest.
तात्पर्य
सजावटी गहनों के अलावा, यशोदा ने उन्हें सुरक्षित रखने के लिए उनके शरीर पर कई चीजें लाई थीं, जैसे बाघ के नाखून, जादुई तावीज़, सुरक्षा के धागे, घावों को भरने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी-बूटियाँ और गरुड़ मणि (जहर से सुरक्षा के लिए पन्ने)।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)