श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  2.6.128 
अथ श्री-राधिकानीय
सा मनोहर-लड्डुकम्
कृष्णस्य वामतो दध्रे
गुटिका-पूरिकान्वितम्
 
 
अनुवाद
इसके बाद श्री राधिका मनोहर लड्डू लेकर आईं, छोटे गोल और बड़े चपटे, और उन्हें कृष्ण के बाईं ओर रख दिया।
 
Sri Radhika then brought beautiful laddus, small round and large flat, and placed them on the left side of Krishna.
तात्पर्य
मनोहर-लड्डू को उचित नाम दिल का लड्डू दिया गया है जो "दिल चुरा लेता है।" श्री राधा ने इन लड्डुओं को कृष्ण के बायें हाथ पर इस प्रकार रखा, जिससे वे आसानी से उन्हें ले सकें।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)