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श्लोक 2.6.119  |
तथा पानक-जातं च
कचोला-भृतम् उत्तमम्
भृङ्गारिका-भृताश् चापो
मध्ये मध्ये पिबञ् शिवाः |
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| अनुवाद |
| कभी-कभी वे बड़े-बड़े कटोरे में रखे सभी प्रकार के स्वादिष्ट पेय पदार्थ तथा घड़ों में रखा शुद्ध जल भी पी लेते थे। |
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| Sometimes he would also drink all kinds of delicious drinks kept in big bowls and pure water kept in pitchers. |
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