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श्री बृहत् भागवतामृत
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खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य
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अध्याय 6: अभीष्ट-लाभ (सभी इच्छाओं का प्राप्ति)
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श्लोक 107
श्लोक
2.6.107
स्व-धात्र्या वाक्यम् आकर्ण्य
मुखरायाः पुनर् बहिः
भूत्वाभिप्रेत्य तन्-नर्म
स-रोषम् इव साब्रवीत्
अनुवाद
वृद्ध महिला (अपनी धाय मुखरा) के ये विनोदपूर्ण शब्द सुनकर यशोदा पुनः बाहर आईं और जब उन्हें मजाक समझ आया, तो वे क्रोधित होकर बोलीं।
Hearing these humorous words of the old woman (her nurse Mukhra), Yashoda came out again and when she understood the joke, she spoke angrily.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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