चूँकि संस्कृत में संज्ञाएँ एकवचन, द्विवचन या बहुवचन हो सकती हैं और चूँकि भवताम् ("आपके द्वारा") शब्द बहुवचन है, यहाँ शब्द इंगित करता है कि नारद न केवल उद्धव और गोप-कुमार से बात कर रहे हैं बल्कि प्रभु के सभी पूर्ण रूप से समर्पित सेवकों से बात कर रहे हैं।
