श्रीमान उद्धव ने कहा: उनका जन्म व्रजभूमि में हुआ था और वहीं वे ग्वाले के रूप में कार्यरत थे। और वे भगवान गोपाल की पूजा में दृढ़निश्चयी हैं। वे निश्चय ही आपसे और मुझसे कहीं अधिक महान आत्मा हैं।
Sriman Uddhava said: He was born in Vrajabhumi and worked there as a cowherd. And he is steadfast in his worship of Lord Gopala. He is certainly a greater soul than you or me.
तात्पर्य
नारद ने अभी-अभी उद्धव को बताया है कि श्री गोलोक एक ऐसा स्थान है जिसे वह और उद्धव शायद ही प्राप्त कर सकते हैं। इस कथन ने उद्धव को कुछ हद तक परेशान कर दिया क्योंकि उन्हें इस बात का आभास अच्छा नहीं लगा कि वह खुद वैकुण्ठ में सभी से बेहतर हैं। फिर भी, उनकी इच्छा गोपाल-कुमार का आज्ञा के अनुसार उपदेश करके नारद को प्रसन्न करने की थी। इसलिए उन्होंने पहले अपनी राय दी कि गोपाल-कुमार सबसे अधिक आध्यात्मिक रूप से विकसित व्यक्ति थे, न कि वह खुद या नारद। आखिरकार, गोपाल-कुमार गोवर्धन के निवासी थे, पवित्र धाम में गायों की आजीवन देखभाल करने वाले, और श्री मदन-गोपाल जी और उनके दस-अक्षर मंत्र के उपासक थे। इसके अलावा, गोपाल-कुमार जहाँ भी जाते थे, वे असंतुष्ट रहते थे क्योंकि वे अपने पूजनीय भगवान को नहीं पा सकते थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥