गोलोक बहुत दूर है, और वहाँ का सुख हमें अप्राप्य है। और उस धाम को पाने का साधन भी इतना दुर्लभ है कि हम उसके लिए केवल प्रार्थना ही कर सकते हैं।
Goloka is far away, and the happiness there is unattainable. And the means to attain that abode are so rare that we can only pray for it.
तात्पर्य
हालाँकि आध्यात्मिक दायरे में समय और स्थान नहीं होते हैं, लेकिन गोलोक को अभी भी बहुत दूर माना जाता है इस अर्थ में कि वैकुण्ठ के सामान्य निवासी इसके पास नहीं पहुँच सकते हैं। न ही वे श्री नंद-नंदन को देखने और उसके बचपन के नाटक में भाग लेने का सुख भोग सकते हैं। भगवान नारायण के घनिष्ठ साथी भी गोलोक में भक्तों के सौभाग्य की पूजा करते हैं, एक ऐसा स्थान जिस तक वे केवल प्रार्थना में ही पहुँच सकते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥