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श्लोक 2.5.60  |
तद् एनं बत तत्रत्य-
लोकानुग्रह-कातरः
भवान् अपि न पार्श्व-स्थं
प्रतिबोधयते क्षणम् |
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| अनुवाद |
| हे उद्धव, आप तो सदैव व्रजवासियों का कल्याण करने के लिए तत्पर रहते हैं। फिर क्यों न आप अपने पास उपस्थित इस बालक को भी कुछ क्षण समझाएँ? |
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| O Uddhava, you are always eager to do good to the people of Vraja. So why not take a moment to explain to this boy present with you? |
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