एवम् उद्धव-गेहे मे
दिनानि कतिचिद् ययुः
यदि स्यात् को ’पि शोकस् तं
संवृणोम्य् अवहित्थया
अनुवाद
उद्धव के घर में इस प्रकार बिताए कई दिनों में यदि मुझे कोई दुःख होता तो मैं उसे प्रसन्नता का दिखावा करके छिपा लेता।
During the many days spent in Uddhava's house, if I felt any sadness, I would hide it by pretending to be happy.
तात्पर्य
कृष्ण के द्वारा द्वारका से偶尔 अनुपस्थिति के अतिरिक्त , गोप-कुमार के लिए चिंता का एक और कारण उनकी जन्म-भूमि को स्मरण करने की प्रवृत्ति थी। यद्यपि अपने पूजनीय भगवान को व्रज की लीलाओं में खेलते हुए न देख पाने से गोप-कुमार दुखी हो जाते थे , लेकिन उन्होंने इसे छिपाने की बहुत कोशिश की क्योंकि वह जानते थे की द्वारका-वासियों को किसी को भी कष्ट में देखना बर्दाश्त नहीं था और इसलिए भी क्योंकि वह अपने निजी आनंद को दिखाने में अनिच्छुक थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥