श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 246
 
 
श्लोक  2.5.246 
तस्या व्रज-भुवो वेत्ति
भवान् एव महिष्ठताम्
निजेष्ट-दैवतं कृष्णं
त्यक्त्वा यत्रावसच् चिरम्
 
 
अनुवाद
आप उस व्रजभूमि की परम महिमा जानते हैं। आपने अपने आराध्य भगवान कृष्ण को त्यागकर वहाँ बहुत समय तक निवास किया था।
 
You know the supreme glory of that land of Vraja. Having abandoned your beloved Lord Krishna, you resided there for a long time.
तात्पर्य
गोपा-कुमार को पृथ्वी पर गोकुल वापस लौटने की पहले सिफारिश नहीं करने के लिए, नारद इस आधार पर खुद को माफ कर देते हैं कि वे गोकुल के विशेष गुणों को उद्धव की तरह नहीं जानते।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)