श्री रुक्मिणी से शुरू होकर, कृष्ण की सभी रानियाँ उनकी पत्नी होने के लिए पूर्ण रूप से योग्य हैं। इसलिए, हम यह अनुमान लगा सकते हैं कि वे हर तरह से श्रेष्ठ हैं, बिल्कुल उसी तरह जैसे वह हैं। जब रानियाँ आंतरिक महल में प्रवेश करती थीं, तो दासी उनके पीछे-पीछे आती थीं, प्रत्येक दासी अपनी रानी के व्यक्तित्व के बिल्कुल अनुकूल होती थी। रानियों की सेवा के लिए, ये परिचारक पालकी, चामर पंखे और पान रखने वाले बक्से जैसी वस्तुएँ ले जाती थीं।
