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श्लोक 2.5.232  |
कृष्णे गते मधु-पुरीं बत बल्लवीनां
भावो ’भवत् सपदि यो लय-वह्नि-तीव्रः
प्रेमास्य हेतुर् उत तत्त्वम् इदं हि तस्य
मा तद्-विशेषम् अपरं बत बोद्धुम् इच्छ |
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| अनुवाद |
| जब कृष्ण मथुरा नगरी गए, तो गोपियाँ तुरन्त ही विश्व प्रलय की अग्नि से भी अधिक तीव्र अवस्था में डूब गईं। सीधा-सादा सत्य यह है कि इस अवस्था का कारण प्रेम था। मैं आपसे विनती करता हूँ कि कृपया इस पर और अधिक गहराई से विचार न करें। |
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| When Krishna went to the city of Mathura, the gopis immediately fell into a state of ecstasy more intense than the fire of universal destruction. The simple truth is that the cause of this state was love. I request you to please not dwell on this further. |
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