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श्लोक 2.5.208  |
स्वस्योद्धवस्य ते ’प्य् एष
कृत्वाहं शपथं ब्रुवे
दुःसाध्यं तत् पदं ह्य् अत्र
तत्-साधनम् अपि ध्रुवम् |
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| अनुवाद |
| मैं अपनी ओर से तथा उद्धव की ओर से आपको प्रमाणित करता हूँ कि यहाँ से भगवान के धाम तक पहुँचना वास्तव में सबसे कठिन है - तथा उस तक पहुँचने का अनुशासन भी उतना ही कठिन है। |
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| I certify to you on my own behalf and on behalf of Uddhava that reaching the abode of God from here is indeed the most difficult – and the discipline to reach there is equally difficult. |
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