अतस् तदानीं वैकुण्ठे
न मया ते प्रकाशितम्
परं त्वद्-भाव-माधुर्य-
लोलितो ’त्रावदं कियत्
अनुवाद
इसीलिए मैंने वैकुंठ में तुम्हें ये बातें नहीं बताईं। यहाँ, केवल तुम्हारे प्रभु-प्रेम के आकर्षण से प्रेरित होकर, मैंने इनके बारे में थोड़ा-सा बताया है।
That is why I did not tell you these things in Vaikuntha. Here, moved only by the attraction of your love for God, I have told you a little about them.
तात्पर्य
वैकूंठ में नहीं बल्कि उद्धव के घर द्वारका में ही ये उचित था गोप-कुमार को गोलोक और उनके भक्तो के विषय में बताया जाए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥