अन्योन्यम् आसित् संजल्प
उत्तम-श्लोक-चेतसां
कौरवेन्द्र-पुर-स्त्रीणां
सर्व-श्रुति-मनो-हरः
"भगवान के दिव्य गुणों के विचार में लीन, जो श्रेष्ठ कविता में महिमामंडित है, हस्तिनापुर के सभी घरों की छतों पर महिलाएँ उनसे बात करने लगीं। यह बात वेदों के भजनों से अधिक आकर्षक थी।"
श्रील श्रीधर स्वामी बताते हैं: "हस्तिनापुर की महिलाओं की प्रार्थनाओं ने सभी वेदों का ध्यान आकर्षित किया, और इस तरह व्यक्तिगत उपनिषदों ने उन महिलाओं को बधाई दी। क्योंकि महिलाएं कौरव राजा श्री युधिष्ठिर की राजधानी से संबंधित थीं, इसका तात्पर्य यह है कि उनके साथ उनके संबंध के कारण वे निश्चित रूप से इस तरह की अनुभूतियों को बोल सकती थीं।"
इसके अलावा, हस्तिनापुर की महिलाओं ने उनके लिए दर्दनाक संकट के क्षण में उन अनुभूतियों को व्यक्त किया, जब कृष्ण कौरव राजधानी को छोड़कर अपने शहर द्वारका जा रहे थे। कृष्ण का प्रभाव इतना अद्भुत है कि जब कृष्ण उन्हें छोड़ रहे थे, तब भी वे द्वारका और वृंदावन में अपने प्रतिद्वंद्वियों की महिमा कर सकते थे।
