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श्लोक 2.5.192  |
अहं वराकः को नु स्यां
तासां माहात्म्य-वर्णने
तथापि चपला जिह्वा,
मम धैर्यं न रक्षते |
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| अनुवाद |
| मैं तो एक तुच्छ प्राणी हूँ। गोपियों की महिमा का वर्णन करने का मुझे क्या अधिकार है? फिर भी मेरी कुटिल जिह्वा शांत नहीं रह सकती। |
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| I am but a lowly creature. What right do I have to describe the glories of the gopis? Yet my wicked tongue cannot remain silent. |
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