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श्लोक 2.5.188  |
ततो ’ति-विस्मयाविष्टो
नारदो भगवान् पुनः
निरीक्ष्यमाणो माम् आर्तं
स-सम्भ्रमम् इदं जगौ |
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| अनुवाद |
| तब महाबली नारदजी ने आश्चर्य में डूबकर मेरी ओर पुनः देखा और बड़े आदर के साथ मुझसे बोले। |
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| Then Mahabali Narada looked at me again in surprise and spoke to me with great respect. |
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