श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 182
 
 
श्लोक  2.5.182 
श्री-गोप-कुमार उवाच
इत्य् उक्त्वोद्धवम् आलिङ्ग्य
स-दैन्यं काकु-चाटुभिः
ययाचे नारदस् तस्य
किञ्चित् त्वं कथयेति सः
 
 
अनुवाद
श्रीगोपकुमार बोले: ऐसा कहकर नारदजी ने उद्धवजी को गले लगा लिया और बड़ी विनम्रता से करुण एवं प्रार्थनापूर्ण वाणी में उनसे विनती की, "कृपया हमें इस विषय में कुछ बताइये।"
 
Sri Gopakumara said: Having said this, Narada embraced Uddhava and humbly, in a compassionate and prayerful voice, requested him, "Please tell us something about this matter."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)