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श्लोक 2.5.173  |
तात तादृश-गोपाल-
देव-पाद-सरोजयोः
विनोद-माधुरीः तां ताम्
उत्सुको ’सीक्षितुं कथम् |
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| अनुवाद |
| हे बालक, तुम इन गोपालदेव के चरणकमलों की शरण लेने तथा उनकी मधुर लीलाओं को देखने के लिए इतने उत्सुक कैसे हो? |
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| O child, how are you so eager to take shelter of the lotus feet of this Gopaldev and to witness his sweet pastimes? |
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