इस श्लोक में वर्णित वृंदावन के जीवों को घटती हुई बुद्धि के क्रम में सूचीबद्ध किया गया है। गायों, बैलों और बछड़ों के साथ, गाँव के जानवरों में भैंस, भेड़ और बकरियाँ भी शामिल थीं। वे पालतू जानवर हर दिन कृष्ण के साथ रहते थे। हिरण और अन्य वन्य प्राणियों ने उन्हें कम ही देखा, लेकिन कृष्ण की बाँसुरी सुनकर उन्होंने भी प्रेम के आनंद का स्वाद चखा। वृंदावन के जंगल में रहने वाले पक्षी, जो कृष्ण को उनके पेड़ों के नीचे आराम करते हुए देखते थे, और यहाँ तक कि दूर की झीलों में रहने वाले पक्षियों के पास कृष्ण के बाँसुरी बजाने पर पास आने की दिव्य बुद्धि थी। अचल प्राणी-पेड़, झाड़ियाँ और बेलें-और यहाँ तक कि निर्जीव नदियाँ भी रासोत्सव में शामिल हो गईं, जो कृष्ण की बाँसुरी की धुन से हुई थी। और पृथ्वी की सतह पर व्रज में मौजूद सभी प्राणियों के अलावा, उस उत्सव में शामिल होने वालों में आकाश में बादल भी शामिल थे।
