श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 148
 
 
श्लोक  2.5.148 
आश्चर्यं वै शृणु पशु-गणा बुद्धि-हीनत्वम् आप्ता
गावो वत्सा वृष-वन-मृगाः पक्षिणो वृक्ष-वासाः
दूरे क्रीडा-रत-जल-खगाः स्थावरा ज्ञान-शून्या
नद्यो मेघा अपि निज-निजं तत्यजुस् तं स्वभावम्
 
 
अनुवाद
सुनो, मैं तुम्हें एक अद्भुत बात बताता हूँ: कृष्ण की बांसुरी सुनकर, जन्म से ही अज्ञानी, अनेकानेक पशु-पक्षियों ने अपना स्वभाव त्याग दिया। गायों ने, बैलों और बछड़ों ने, वन के जंगली पशुओं ने, वृक्षों पर रहने वाले पक्षियों ने, दूर के सरोवरों में विहार करने वाले जलपक्षियों ने, वृक्षों और पौधों ने, यहाँ तक कि नदियों और बादलों जैसे निर्जीव प्राणियों ने भी अपना स्वभाव त्याग दिया।
 
Listen, I'll tell you something amazing: Upon hearing Krishna's flute, countless animals and birds, born ignorant, abandoned their natural nature. Cows, bulls, and calves, wild animals of the forest, tree-dwelling birds, waterfowl roaming in distant lakes, trees and plants, even inanimate beings like rivers and clouds, abandoned their natural nature.
तात्पर्य
रस की कला में निपुण, व्रज-वासियों से यह अपेक्षा की जा सकती है कि वे कृष्ण की बाँसुरी की ध्वनि पर उत्साह से प्रतिक्रिया दें। आश्चर्यजनक बात यह है कि सुस्त जानवरों और यहाँ तक कि छोटे प्राणियों ने भी उस उमंग को साझा किया।

इस श्लोक में वर्णित वृंदावन के जीवों को घटती हुई बुद्धि के क्रम में सूचीबद्ध किया गया है। गायों, बैलों और बछड़ों के साथ, गाँव के जानवरों में भैंस, भेड़ और बकरियाँ भी शामिल थीं। वे पालतू जानवर हर दिन कृष्ण के साथ रहते थे। हिरण और अन्य वन्य प्राणियों ने उन्हें कम ही देखा, लेकिन कृष्ण की बाँसुरी सुनकर उन्होंने भी प्रेम के आनंद का स्वाद चखा। वृंदावन के जंगल में रहने वाले पक्षी, जो कृष्ण को उनके पेड़ों के नीचे आराम करते हुए देखते थे, और यहाँ तक कि दूर की झीलों में रहने वाले पक्षियों के पास कृष्ण के बाँसुरी बजाने पर पास आने की दिव्य बुद्धि थी। अचल प्राणी-पेड़, झाड़ियाँ और बेलें-और यहाँ तक कि निर्जीव नदियाँ भी रासोत्सव में शामिल हो गईं, जो कृष्ण की बाँसुरी की धुन से हुई थी। और पृथ्वी की सतह पर व्रज में मौजूद सभी प्राणियों के अलावा, उस उत्सव में शामिल होने वालों में आकाश में बादल भी शामिल थे।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)