श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 116
 
 
श्लोक  2.5.116 
त्रै-मासिको यः शकटं बभञ्ज
स्थूलं शयानो मृदुना पदेन
स्तन्याय रोदित्य् उत यः प्रसूं द्वि-
वारौ मुखे दर्शयति स्म विश्वम्
 
 
अनुवाद
तीन महीने की उम्र में, कृष्ण एक बड़ी गाड़ी के नीचे लेट गए और अपने कोमल पैर से उसे तोड़ दिया, और फिर वे दूध के लिए रोए। दो अवसरों पर उन्होंने अपनी माँ को अपने मुख में सम्पूर्ण ब्रह्मांड का दर्शन कराया।
 
At three months old, Krishna lay down under a large cart and broke it with his tender foot, then cried for milk. On two occasions, he showed his mother the entire universe in his mouth.
तात्पर्य
पाठ 116 से 137 तक नारद ने श्रीमद्भगवतम के दसवें सर्ग में वर्णित कृष्ण की कई लीलाओं का सार बताया है। जो भी इन लीलाओं के बारे में अधिक जानकारी चाहता है, वह इस महान शास्त्र से परामर्श कर सकता है। पहली प्रमुख लीला पूतना का उद्धार है, नारद ने कृष्ण की दयालु प्रकृति की स्तुति करते समय इसका उल्लेख किया है। सारांश इसलिए गाड़ी तोड़ने से शुरू होता है। जिस गाड़ी के नीचे शिशु कृष्ण लेटे थे, वह बड़ी थी जैसा कि यहाँ शब्द स्थूलम द्वारा इंगित किया गया है। जैसे कि शुकदेव गोस्वामी कहते हैं, यह इतना बड़ा था कि कृष्ण के द्वारा इसे गिराने के बाद उसे फिर से उठाने के लिए कई मजबूत ग्वालों की आवश्यकता थी:

पूर्व-वत स्थापितं गोपैर्

बलिभिः सह-परिच्छदम

"मजबूत, मोटे ग्वालों ने हाथ गाड़ी पर मटकों और सामग्री को इकट्ठा किया और उसे पहले की तरह स्थापित किया।" (भागवतम 10.7.12)

गाड़ी को गिराने के अपने चमत्कारी कार्य के बाद, कृष्ण ने अपनी माँ को आने और उन्हें अपना दूध पिलाने के लिए चिल्लाया। यह विचार करना आश्चर्यजनक है कि इतनी बेजोड़ शक्ति वाला व्यक्ति भी अपनी माँ के स्तन के दूध के लिए चिल्ला सकता है। और दूसरे दृष्टिकोण से, यह भी आश्चर्यजनक है कि कृष्ण ने गाड़ी को नष्ट करने के बाद अपनी माँ से दूध माँगा जो कि घर की सबसे मूल्यवान संपत्ति थी। बच्चे कृष्ण ने अपनी माँ यशोदा को दो बार अपने मुंह के भीतर ब्रह्मांड दिखाया: एक बार अपने स्तन से दूध पीते हुए और फिर जब उन्होंने उन पर मिट्टी खाने का आरोप लगाया। फिर यह कितना अधिक आश्चर्यजनक है कि ऐसा व्यक्ति जो इस तरह के चमत्कार कर सकता है वह अपनी माँ के दूध के लिए भी चिल्ला सकता है।

हालाँकि त्रनावर्त राक्षस को मारने के बाद माँ यशोदा ने दो अलग-अलग मौकों पर कृष्ण के मुँह में स्थित ब्रह्मांड के बारे में दृष्टिकोण देखा था, लेकिन इस पद में उनका एक साथ वर्णन किया गया है ताकि यह उजागर किया जा सके कि यह कितना आश्चर्यजनक है कि यह शक्तिशाली कृष्ण दूध के लिए असहाय रूप से रो रहा था। कृष्ण की गोकुल वृंदावन लीलाएँ अत्यंत शानदार और मनमोहक हैं क्योंकि वे परमेश्वर की शक्ति के चरम प्रदर्शन को उनकी मधुरता के चरम प्रदर्शन के साथ जोड़ती हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)