श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 5: प्रेम (भगवान का प्रेम)  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.5.1 
श्री-गोप-कुमार उवाच
अथ तत्र गतो विप्रैः
कियद्भिर् माथुरैः सह
यादवान् क्रीडतो ’द्राक्षं
सङ्घशः स-कुमारकान्
 
 
अनुवाद
श्रीगोपकुमार ने कहा: फिर मैं द्वारका गया। वहाँ मैंने यादवों के विभिन्न समूहों को उनके बच्चों सहित देखा। उनके साथ मथुरा के कुछ ब्राह्मण भी थे और वे आनंद मना रहे थे।
 
Sri Gopakumara said: Then I went to Dwaraka. There I saw various groups of Yadavas with their children. Some Brahmins from Mathura were also with them, and they were celebrating.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)