श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  2.4.82 
बहूनि गमितान्य् अङ्ग
जन्मानि भवता सखे
कथञ्चिद् अपि मय्य् आभि-
मुख्यं किञ्चिद् अकारि न
 
 
अनुवाद
मेरे प्रिय मित्र, तुमने कई जन्म मुझ पर ध्यान दिए बिना ही बिता दिए हैं।
 
My dear friend, you have spent many lifetimes without paying attention to me.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)