श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.4.8 
एवं स-गानं बहुधाह्वयंस् तं
क्षणं प्रनृत्यन् क्षणम् उद्रुदंश् च
उन्मत्त-वत् कामम् इतस् ततो ’हं
भ्रमामि देहादिकम् अस्मरन् स्वम्
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मैंने कृष्ण को पुकारा और नाना प्रकार से उनकी महिमा का गान किया। कभी मैं उल्लासित होकर नाचता, तो कभी ज़ोर-ज़ोर से रोने लगता। मैं पागलों की तरह अपनी मनमर्जी से इधर-उधर भटकता रहा, अपना शरीर और बाकी सब कुछ भूल गया।
 
Thus I called upon Krishna and sang His glories in various ways. Sometimes I danced in ecstasy, and sometimes I wept loudly. Like a madman, I wandered aimlessly here and there, forgetting my body and everything else.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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