श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  2.4.74 
श्री-नारदस्याद्भुत-नृत्य-वीणा-
गीतादि-भङ्गी-मय-चातुरीभिः
ताभ्यां प्रियाभ्यां कमला-धराभ्यां
सार्धं कदाचिद् विहसन्तम् उच्चैः
 
 
अनुवाद
श्री नारद के नृत्य, उनके कुशल गायन और वीणा वादन ने ऐसा चतुराईपूर्ण मनोरंजन रचा कि भगवान और उनकी दोनों पत्नियाँ, रमा और धरणी, कभी-कभी जोर से हँस पड़ते थे।
 
Sri Narada's dancing, his skillful singing and playing of the Veena created such clever entertainment that the Lord and his two wives, Rama and Dharani, sometimes burst into loud laughter.
तात्पर्य
लक्ष्मी, या अथवा रामा को कमला भी कहा जाता है, और धरनी को धरा भी कहा जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)