सर्व-प्रपञ्चातीतानां
तेषां वैकुण्ठ-वासिनाम्
तस्य वैकुण्ठ-लोकस्य
तस्य तन्-नायकस्य च
तानि माहात्म्य-जातानि
प्रपञ्चान्तर्-गतैः किल
दृष्टान्तैर् नोपयुज्यन्ते
न शक्यन्ते च भाषितुम्
अनुवाद
वैकुंठवासी समस्त भौतिकता से परे हैं। भौतिक सृष्टि के लोगों के लिए, उन निवासियों की नानाविध महिमाएँ तथा वैकुंठ लोक एवं उसके स्वामी की महिमाएँ सादृश्य से परे हैं और शब्दों में वर्णन करने की शक्ति से परे हैं।
The inhabitants of Vaikuntha are beyond all materiality. For those in the material world, the manifold glories of those inhabitants, as well as the glories of the Vaikuntha planet and its Lord, are beyond comparison and beyond the power of words to describe.
तात्पर्य
सामान्यतः किसी भी लोक में विभिन्न जीवन रूप सापेक्ष श्रेष्ठता और हीनता के एक विशाल श्रेणीक्रम का संकेत देते हैं, जैसा कि गोप-कुमार ने स्वर्ग के निवासियों के बीच देखा था। वैकुण्ठ में ऐसा श्रेणीक्रम अपनी जगह से हटकर लग सकता है, जहाँ सभी को सच्चिदानंद के धरातल पर समान होना चाहिए। गोप-कुमार अपने शिष्य को वास्तविक स्थिति सावधानीपूर्वक समझाना चाहता है, लेकिन वैकुण्ठ की पारलौकिक वास्तविकता के लिए भौतिक उदाहरणों को लागू करके अपराध करने से डरता है। इसलिए वह पहले एक अस्वीकरण देता है: ज्ञात संसार की चीजों की तुलना नवोदित लोगों को आध्यात्मिक दुनिया को समझने में मदद कर सकती है, लेकिन उस उच्च वास्तविकता के साथ कभी भी पूर्ण न्याय नहीं कर सकती है। चूंकि आध्यात्मिक अस्तित्व की श्रेणियां भौतिक दुनिया की श्रेणियों से बिल्कुल अलग होती हैं, आध्यात्मिक रूप से अपरिपक्व बुद्धि में उन्हें सीधे समझने की कोई शक्ति नहीं होती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥