श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.4.28 
के ’प्य् एकशो द्वन्द्वशो ’न्ये
युगपद् बहुशो ’परे
पूर्व-पूर्वाधिक-श्रीकाः
प्रविशन्ति पुरीं प्रभोः
 
 
अनुवाद
कई अन्य लोग भी आये - कुछ अकेले, कुछ जोड़े में, और कुछ बड़े समूहों में - और वे सभी, जिनमें से प्रत्येक पिछले वाले से अधिक शानदार था, प्रभु के शहर में प्रवेश कर गये।
 
Many others also came—some alone, some in pairs, and some in large groups—and all of them, each more glorious than the last, entered the city of the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)