श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 259
 
 
श्लोक  2.4.259 
मां तत्र हित्वा निज-सेवयाहृतः
प्लुत्यैकया श्री-हनुमान् गतो ’न्तिकम्
सीतानुरूपा रमते प्रिया प्रभोः
सव्ये ’स्य पार्श्वे ’नुज-लक्ष्मणो ’न्यतः
 
 
अनुवाद
श्री हनुमान मुझे छोड़कर चले गए, अपनी नियमित सेवा से पीछे हटे, और एक ही छलांग में अपने प्रभु के पास जा पहुँचे। प्रभु के बाईं ओर, अपनी सेवा से उन्हें प्रसन्न करती हुई, उनकी प्रिय प्रतिरूपा सीता खड़ी थीं, और दूसरी ओर उनके छोटे भाई लक्ष्मण।
 
Sri Hanuman left me, withdrew from his regular service, and in a single leap reached his Lord. To the Lord's left, pleasing Him with her service, stood his beloved consort, Sita, and on the other side stood his younger brother, Lakshmana.
तात्पर्य
गोपा-कुमार को उसी स्थान पर छोड़ कर जहां वह जमीन पर गिरे थे, हनुमान भगवान रामचंद्र जी के पास बंदरों की तरह कूदते हुए गए। हनुमान अपने स्वामी के पास शाश्वत सेवा के परमानंद आकर्षण से खिंचे चले गए। उनकी इच्छा, सबसे ऊपर थी, जो कुछ भी करना था, जिससे उनके स्वामी को सबसे अधिक आनंद मिलेगा। यद्यपि भगवान रामचंद्र का दर्शन स्वाभाविक रूप से आनंदमय है, जब वह अपने प्रिय जानकी के साथ लक्ष्मण और अपने सर्वश्रेष्ठ सेवक हनुमान के साथ होते हैं, तो उनकी सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है, और जो भी उन्हें देखता है, वह सबसे असाधारण परमानंद में डूब जाता है। सीता, लक्ष्मण और हनुमान के साथ भगवान रामचंद्र की यह तस्वीर अपने अंतरंग सेवकों के साथ पारस्परिक रूप से प्रेम करने वाले अपने विशेष करुणामय मूड में भगवान को दर्शाती है। सीतादेवी विशेष रूप से भगवान रामचंद्र के लिए पूरी तरह से संगत संघी हैं, और उनकी सुंदरता और अन्य गुण वैकुण्ठ में देवी लक्ष्मी से भी बढ़कर हैं। स्वामी के बाईं ओर खड़े होकर, वह ऐसे मनोरंजन दिखाती हैं जैसे उन्हें चबाने के लिए सुपारी देना।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)