श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 251
 
 
श्लोक  2.4.251 
दूराद् एव गतो ’द्राक्षं
वानरांस् तान् इतस् ततः
प्लवमानान् महा-लोलान्
राम रामेति वादिनः
 
 
अनुवाद
बहुत दूर तक यात्रा करने के बाद, मैंने देखा कि कुछ वन बंदर बेचैनी से इधर-उधर कूद रहे थे और चिल्ला रहे थे, “राम, राम!”
 
After travelling a long distance, I saw some forest monkeys jumping restlessly here and there and shouting, “Rama, Rama!”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)