श्रीगोपकुमार बोले: यह सुनकर मैं अत्यन्त प्रसन्न हुआ और श्रीनारदजी को बारम्बार प्रणाम करके उनका आशीर्वाद लिया और उनकी आज्ञाओं का स्मरण करते हुए चल पड़ा।
Shri Gopakumar said: I was very happy to hear this and after saluting Shri Naradji again and again, I took his blessings and started walking remembering his orders.
तात्पर्य
अयोध्या के लिए प्रस्थान करने के बाद, गोपा-कुमार ने नारद के आदेशानुसार भगवान रामचंद्र की महिमा का स्मरण किया, और इस प्रकार वे जप करते थे: 'हे सीता के पति, रघुनाथ, लक्ष्मण के बड़े भाई! हे भगवन, श्री हनुमान के प्रिय स्वामी!' (पाठ 243)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥