श्री बृहत् भागवतामृत  »  खण्ड 2: उत्तर-खण्ड: श्री गोलोक महात्म्य  »  अध्याय 4: वैकुण्ठ (आध्यात्मिक जगत)  »  श्लोक 241-242
 
 
श्लोक  2.4.241-242 
साक्षाद्-भगवतस् तस्य
श्री-कृष्णस्यावतारिणः
उपासना-विशेषेण
सर्वं यद्य् अपि लभ्यते

तथापि रघु-वीरस्य
श्रीमत्-पाद-सरोजयोः
तयो रस-विशेषस्य
लाभायोपदिशाम्य् अहम्
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण आदि भगवान हैं, समस्त अवतारों के मूल हैं, और उनकी आराधना मात्र से सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है। फिर भी मैं तुम्हें रघुवीर भगवान राम के दिव्य चरणकमलों का विशेष आस्वादन प्राप्त करने में सहायता करने के लिए शिक्षा दूँगा।
 
Sri Krishna is the original Lord, the source of all incarnations, and everything can be attained simply by worshipping Him. Nevertheless, I will teach you to help you attain a special taste of the divine feet of the mighty Lord Rama.
तात्पर्य
अनुभव से, गोपा-कुमार पूर्ण रूप से आश्वस्त हैं कि वह जो भी चाहता है वह श्री मदन-गोपाल की पूजा के लिए दस-अक्षरों वाले मंत्र के स्वामी की शरण लेकर आसानी से प्राप्त कर सकता है। यह सुझाव कि वह श्री रघुनाथ के चरण-कमलों का आश्रय लेते हैं, इसका विरोधाभास नहीं करता। जैसा कि श्रीमद्- भागवतम (1.3.28) में कहा गया है, कृष्ण भगवान रामचंद्र सहित सभी भगवानों के विस्तार का एकमात्र स्रोत हैं। एते चांश-कला पुंसः कृष्ण तु भगवान स्वयं: "ये सभी अवतार या तो प्रभु के पूर्ण भाग हैं या पूर्ण भागों के भाग हैं, लेकिन भगवान श्री कृष्ण भगवान के मूल व्यक्तित्व हैं।" कृष्ण के भक्त भगवान राम में अपने स्वयं के देवता की सभी आकर्षक विशेषताओं को देखते हैं। श्रीमद्-भागवतम (9.11.19) में श्री शुकदेव गोस्वामी भगवान रामचंद्र के असाधारण रूप से सुंदर कमल के चरणों का उल्लेख करते हैं:

स्मृताम हृदि विन्यस्य

विद्धं दंडक-कंटकैः

स्व-पाक-पल्लवं राम

आत्म-ज्योतिर अगात ततः

"जब भगवान रामचंद्र दंडकारण्य में रहते थे, तब उनके कमल के चरण कभी-कभी कांटों से छिदे जाते थे। यज्ञ पूरा करने के बाद उन्होंने उन कमल के चरणों को उन लोगों के हृदयों में रख दिया जो हमेशा उनके बारे में सोचते हैं। फिर उन्होंने ब्रह्म-ज्योति से परे वैकुण्ठ ग्रह अपने निवास में प्रवेश किया।" उन कमल के चरणों में एक अनोखे रस का स्वाद चखा जाना है, परमानंद पूजा का एक विशेष भाव और नारद गोपा-कुमार को इसे प्राप्त करने में मदद करना चाहते हैं। विष्णु के सभी अवतारों के स्रोत श्री मदन-गोपाल की भक्ति सेवा से, वांछित सब कुछ आसानी से प्राप्त हो जाता है। फिर भी श्री रघुनाथ भगवान के एक विशेष अवतार हैं; उनकी विशेषताएँ हैं जो कोई भी बिना उनकी पूजा के विशेष भाव को विकसित किए बिना आनंद नहीं ले सकता। नारद अब गोपा-कुमार को भगवान रामचंद्र की पूजा करने की विधि में निर्देश देने की पेशकश करते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)